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सोमवार, 31 दिसंबर 2012

दुनिया से जाने के बाद भी



दुनिया से 
जाने के बाद भी 
मेरे चाहने 
न चाहने वालों से 
मिलूंगा ज़रूर
चाहे ख़्वाबों में मिलूँ 
ख्यालों में आऊँ 
जो भी कहता हूँ 
जो भी लिखता हूँ 
याद दिलाऊंगा ज़रूर 
भले ही बुझ जाए 
मेरी ज़िन्दगी के 
चिराग की रोशनी 
पर मेरे ख्यालों की 
रोशनी ज़हन में 
ज़लाऊंगा ज़रूर 
मेरे ख्याल ही कहते हैं 
मुझसे 
आज मेरी बात मानों 
न मानों 
चाहे आज पढो ना पढो 
पर बात कहूंगा ज़रूर 
चाहे मेरे जाने के बाद 
ही सही 
एक दिन सोचने पर 
मजबूर करूंगा ज़रूर

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
871-55-28-11-2012
विचार,ख्याल, सोच

5 टिप्‍पणियां:

  1. नववर्ष की ढेरों शुभकामना!
    आपकी यह सुन्दर प्रविष्टि आज दिनांक 01-01-2013 को मंगलवारीय चर्चामंच- 1111 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  2. नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  3. गहन अर्थ लिए रचना...
    आपको सहपरिवार नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ....
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपको सहपरिवार नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ....
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  5. ’चाहे आज पढो ना पढो,पर बात कहूंगा जरूर’
    बहूत खूब.

    उत्तर देंहटाएं