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रविवार, 16 दिसंबर 2012

कैसे जानूं



कौन दुश्मन कौन दोस्त 
कैसे जानूं 
जो हँस के मिले उसे दोस्त
जो ना हँसे
क्या उसे दुश्मन मान लूं
जो रहे गंभीर
ज़ाहिर ना कर पाए
मगर दिल से चाहे 
क्या उस पर ज़ुल्म करूँ
या जो चेहरे पर चेहरा
चढ़ाए
जेब में खंजर छुपाये
हँस कर गले मिले
उससे गले मिलूँ
दुश्मन को दोस्त समझ लूं
ज़माने की चाल चलूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
841-25-11-11-2012
दुश्मन,दोस्त

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह सुन्दर प्रविष्टि कल दिनांक 17-12-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-1082 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  2. दुश्मन की अरु मित्र की, मुश्किल है पहचान।
    जो गर्दिश में साथ दे, मित्र उसी को मान।।

    उत्तर देंहटाएं
  3. निज दुःख गिरि सम रज कर जाना ।
    मित्र क दुःख रज मेरु समाना ।।

    बढ़िया है आपने ।
    मेरी नई पोस्ट-गम लिया करते हैं

    उत्तर देंहटाएं