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सोमवार, 3 दिसंबर 2012

राजा है या फ़कीर

पथ पर चलने वाला
राजा है या फ़कीर
पथ को फर्क नहीं पड़ता 
लक्ष्य तक पहुंचाता है 
पेड़ के नीचे कौन बैठा है 
पेड़ को फर्क नहीं पड़ता 
जो भी नीचे बैठता है 
उसे ही छाया दे देता
ना घमंड ना अहंकार 
निरंतर हवा में झूमता है 
पक्षी छोटा हो या बड़ा
उसे अंतर नहीं पड़ता
जो भी बनाता घोंसला
ड़ाल पर
उसे ही बसेरा बसाने देता
इंसान देखता भी सब है
समझता भी सब है
मगर अहम् उसे 
इंसान बनाए नहीं रखता
सदियों से अहम् में 
लुटता रहा है फिर भी 
लुटना नहीं छोड़ता
इंसान कहलाता है 
फिर भी हैवान 
बनना नहीं छोड़ता
थोड़ा सा भी पेड़ से
सीख लेता
भगवान् तो नहीं
इंसान बन कर तो
जी लेता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
829-13-06-11-2012
घमंड,अहंकार,अहम्,स्वार्थ,जीवन ,ज़िन्दगी

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी.बेह्तरीन अभिव्यक्ति .शुभकामनायें.
    आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

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