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शुक्रवार, 28 दिसंबर 2012

उचित -अनुचित



जीवन भर
सब को बताता रहा
क्या उचित
क्या अनुचित है 
उम्र के
सांय काल में आ कर
मंथन किया
तो पता चला जो भी
 जैसा भी सोचा था
अब तक
ना सब उचित था
ना अनुचित था
समय ने सिखाया मुझको
अनुभवानुसार
सोच और मान्यताएं
बदलती रहती
अब निर्णय कर लिया
मैं जो सोचता हूँ
वही उचित,अनुचित है
मानना छोड़ दूंगा
उचित अनुचित का
निर्णय करने से पहले
दूसरों के विचारों को भी
महत्त्व दूंगा
विषय पर विवेक से
गूढ़ मंथन करूंगा
उसके बाद ही अपना
निश्चित मत प्रकट
करूंगा
863-47-23-11-2012
उचित,अनुचित,जीवन,ज़िन्दगी,सोच,मान्यताएं ,अनुभव,

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सही आत्म-मंथन।
    सादर
    मधुरेश

    उत्तर देंहटाएं


  2. ♥(¯`'•.¸(¯`•*♥♥*•¯)¸.•'´¯)♥
    ♥नव वर्ष मंगबलमय हो !♥
    ♥(_¸.•'´(_•*♥♥*•_)`'• .¸_)♥




    अब निर्णय कर लिया
    मैं जो सोचता हूँ
    वही उचित,अनुचित है
    मानना छोड़ दूंगा
    उचित अनुचित का
    निर्णय करने से पहले
    दूसरों के विचारों को भी
    महत्त्व दूंगा

    वाऽह ! क्या बात है !
    आदरणीय डॉ. राजेंद्र तेला "निरंतर" जी

    प्रायः हम स्वयं को सर्वेसर्वा मान लेते हैं याः ठीक नहीं

    सुंदर विचार

    आपकी लेखनी से सदैव सुंदर , सार्थक , श्रेष्ठ सृजन हो …
    नव वर्ष की शुभकामनाओं सहित…
    राजेन्द्र स्वर्णकार

    उत्तर देंहटाएं