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रविवार, 23 दिसंबर 2012

दूर आकाश से आवाज़ बुलाने लगी है



दूर आकाश से
आवाज़ बुलाने लगी है
दीपक की लौ भी कम
होने लगी है
हल्की सी हवा में भी
लहराने लगी है
दीपक में तेल कम हो गया
बाती भी छोटी हो गयी
जीवन की शाम आ गयी
काली रात भी आयेगी
जीवन की लौ को
बुझायेगी
एक दिन आकाश में
गुम हो जायेगी
फिर कहीं नया दीपक
जलेगा
उसका भी तेल ऐसे ही
कम होगा
समय के साथ
समाप्त होगा
दूर आकाश से
आवाज़ बुलाने लगी है
दीपक की लौ भी कम
होने लगी है
854-38-23-11-2012
जीवन,बुढापा,उम्र ,ज़िन्दगी

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 26/12/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  2. समय के साथ साथ लौं कम होती ही चली जाएगी ...ये ही जिंदगी का सार भी है

    उत्तर देंहटाएं