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बुधवार, 5 दिसंबर 2012

बचपन तो लौट नहीं सकता



बचपन तो
लौट नहीं सकता
बच्चा बन कर तो
रह सकता हूँ
आज झगडा 
कल दोस्ती तो 
कर सकता हूँ
पुरानी बातें को 
आसानी से
भूल तो सकता हूँ
हर खेल खेल सकता हूँ
उम्र में बड़ों को
भैया,चाचा,ताऊ तो
कह सकता हूँ
कहीं बैठ सकता हूँ
कहीं खा सकता हूँ
बिना धर्म 
जात पांत पूछे
नए दोस्त तो 
बना सकता हूँ
बेफिक्र जीवन तो
जी सकता हूँ
बचपन तो
लौट नहीं सकता
पर बच्चा बन कर तो
रह सकता हूँ


© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 
821-05-03-11-2012
बचपन,बच्चा,जीवन selected

2 टिप्‍पणियां:

  1. आज के बच्चों का बचपन तो अब हमारे जैसा नहीं है ....खूब उहा-पोह में जीते है वे भी ...
    बढ़िया प्रस्तुति बचपन के दिन की याद दिलाती ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. बच्चे तो बच्चे है ......मन के सच्चे हैं ..

    उत्तर देंहटाएं