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शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

कबीर बनना चाहता हूँ



कबीर बनना
चाहता हूँ
सीधे सपाट शब्दों में
अपनी बात दुनिया तक
पहुचाना चाहता हूँ
कोई पुरूस्कार ना मिले
कोई किताब ना छपे
कुछ फर्क नहीं पडेगा
मुझ को पढने वाले
मेरी बात समझ ले
बस इतनी सी तमन्ना
रखता हूँ
आत्म संतुष्टी के लिए
लिखता हूँ
अगर किसी का भला 
हो जाए
दो पल भी खुश हो जाए 
उसे ही पुरूस्कार
समझता हूँ
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
767-12-07-10-2012
कबीर 

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 10/11/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  2. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर रचना के लिए बधाई |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  5. सच, यही सही दृष्टिकोण है

    उत्तर देंहटाएं
  6. अपने मन के भाव हूँ ही रखे सदा ........


    दीवाली की बहुत बहुत शुभकामनाएँ

    उत्तर देंहटाएं