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मंगलवार, 13 नवंबर 2012

ये हवा भी न जाने कितने चेहरे बदलती है



ये हवा भी न जाने
कितने चेहरे बदलती है
कभी आंधी बन कर
कभी तूफ़ान बन कर
तांडव मचाती है
कभी मंद शीतल
मधुर स्वर लहरी सी
कानों में बंसी बजाती है
मन को प्रफुल्लित करती है
कभी गोरियों के आँचल से
कभी बालों से
अठखेलियाँ करती है
आशिक मिजाजी का
सबूत देती है
कभी सांय सांय की ध्वनी से
मरघट की याद दिलाती है
पता नहीं कहाँ से आती है
कहाँ जाती है
ये हवा भी न जाने
कितने चेहरे बदलती है
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
776-21-23-10-2012
हवा, चेहरे, अठखेलियाँ

1 टिप्पणी:

  1. दीवाली का पर्व है, सबको बाँटों प्यार।
    आतिशबाजी का नहीं, ये पावन त्यौहार।।
    लक्ष्मी और गणेश के, साथ शारदा होय।
    उनका दुनिया में कभी, बाल न बाँका होय।
    --
    ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬●ஜ
    (¯*•๑۩۞۩:♥♥ :|| दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें || ♥♥ :۩۞۩๑•*¯)
    ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬●ஜ

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