ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

गुरुवार, 22 नवंबर 2012

कहीं इतना निश्चिंत ना हो जाऊं



कुछ घटनाएं
ऐसी घटती  
बीती घटनाओं की
दिलाती
भूलना चाहूँ तो भी
नियती भूलने नही देती
बार बार याद करने को
मजबूर करती
चाहती उन्हें सहेज कर
सीने से लगाए रखूँ
सचेत रखती हैं
कहीं इतना निश्चिंत
न हो जाऊं
पहले से भी बड़ा धोखा
 न खा जाऊं


© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 
793-35-25-10-2012
निश्चिंत,धोखा,घटनाएं

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सही कहा है आपने ... इस अभिव्‍यक्ति में

    उत्तर देंहटाएं
  2. मन को छू लेने वाली पंक्तिया

    उत्तर देंहटाएं
  3. सही कहा आपने...
    कुछ घटनाएँ याद बन के ही रह जाती हैं...
    कभी दर्द देती हैं...
    तो कभी जीने के लिए सबक....!!

    उत्तर देंहटाएं