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बुधवार, 7 नवंबर 2012

लफ्ज़ नहीं हूँ तोड़ मरोड़ कर कभी ग़ज़ल कभी नज़्म बना लो

लफ्ज़ नहीं हूँ 
तोड़ मरोड़ कर 
कभी ग़ज़ल 
कभी नज़्म बना लो
मैं ख्याल भी नहीं हूँ 
जब भी चाहो जैसा चाहो 
मेरे बारे में वैसा सोच लो
 ख्वाब भी नहीं हूँ 
जब चाहो देख लो
 हकीकत भी नहीं हूँ  
हर बात पर हाँ भर दो 
पर जो कहता हूँ 
सुनो तो सही 
जो लिखता हूँ 
पढो तो सही 
नहीं समझ आये 
तो मानना मत 
बुरा नहीं मानूंगा 
नहीं सुनोगे नहीं पढोगे 
तो समझ लो 
हकीकत से मुंह छुपाओगे 
झूठ की दुनिया में जियोगे 
अपने फितरत से 
दुनिया को रूबरू कराओगे 
अगर तुम भी कुछ 
कहना चाहते हो 
लिखना चाहते हो तो 
अवश्य कहो अवश्य लिखो 
तुम्हारी सुनूंगा भी 
तुम्हारा लिखा पढूंगा भी 
नहीं समझ आयेगा 
तो मानूंगा नहीं 
जैसा ठीक लगेगा 
वैसा करूंगा
ये ज़रूरी नहीं है 
तुम सब की मानों 
मगर कौन 
क्या कह रहा है 
सुनो तो सही
क्या लिख रहा है 
पढो तो सही
डॉ.राजेंद्र तेला,निरंतर
763-08-05-10-2012
फितरत ,संवाद,कहना ,सुनना,सामंजस्य

2 टिप्‍पणियां:

  1. sundar prastuti मैं ख्वाब भी नहीं हूँ
    जब चाहो देख लो
    मैं हकीकत भी नहीं हूँ
    हर बात पर हाँ भर दो
    पर जो कहता हूँ
    सुनो तो सही
    जो लिखता हूँ
    पढो तो सही

    उत्तर देंहटाएं
  2. behtareen,मैं लफ्ज़ नहीं हूँ
    तोड़ मरोड़ कर
    कभी ग़ज़ल
    कभी नज़्म बना लो
    मैं ख्याल नहीं हूँ
    जब भी चाहो
    वैसा मेरे बारे में सोच लो
    मैं ख्वाब भी नहीं हूँ
    जब चाहो देख लो
    मैं हकीकत भी नहीं हूँ
    हर बात पर हाँ भर दो

    उत्तर देंहटाएं