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रविवार, 18 नवंबर 2012

हमने समझा था



ना जुनून काम आया
ना दीवानगी काम आयी
हमने समझा था हमने
उन्हें अपना बना लिया
उन्हें सिर्फ हमारी
दौलत पसंद आयी
हमने दिल दिया था
उन्होंने सौदा मान लिया
हमसे चंद लम्हे 
साथ गुजारने की
कीमत मांग ली
डा.राजेन्द्र तेला,निरंतर
786-28-24-10-2012
दीवानगी, सौदा, दौलत, दिल

1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी ...बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!शुभकामनायें.
    आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

    उत्तर देंहटाएं