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सोमवार, 12 नवंबर 2012

चाहे नवरात्रि बनाओ ,चाहे दशहरा मनाओ चाहे


नवरात्रि बनाओ
चाहे दशहरा मनाओ
पहले मन के
रावण का नाश करो
माता को
खुश करने से पहले
माता के जैसा
मन तो कर लो
माता
उनकी ही सुनती है
जिनका मन
निश्छल होता है
इतना सा याद रख लो
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  
774-19-23-10-2012
पूजा,दशहरा ,नवरात्रि,माता,रावण,

1 टिप्पणी:

  1. दीवाली का पर्व है, सबको बाँटों प्यार।
    आतिशबाजी का नहीं, ये पावन त्यौहार।।
    लक्ष्मी और गणेश के, साथ शारदा होय।
    उनका दुनिया में कभी, बाल न बाँका होय।।

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