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रविवार, 4 नवंबर 2012

खुशी तो खुशी होती है



गली के
आखिरी छोर में बने
लम्बे घने वृक्षों से घिरे
मेरे मकान में
पत्तों से छन कर
धूप भी टुकड़ों में आती
पर मुझे वही काफी लगती
ठीक मेरी ज़िन्दगी की
खुशियों की तरह
छोटी छोटी बातें ही
मुझे खुश कर देती
लोग कहते हैं
मैंने ज़िन्दगी में बड़ी
खुशी देखी ही नहीं
पर इस बात का मुझे
कोई रंज नहीं
सोचता हूँ
खुशी तो खुशी होती
छोटी या बड़ी से 
क्या फर्क पड़ता है
सोच उसे बड़ा छोटा
बनाता है
इंसान संतुष्ट नहीं हो तो
बड़ी खुशी भी उसे
छोटी लगती
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
756-01-03-10-2012
selected,खुशी, ज़िन्दगी, संतुष्ट, संतुष्टी, सोच, जीवन

5 टिप्‍पणियां:

  1. वाह!
    आपकी इस ख़ूबसूरत प्रविष्टि को कल दिनांक 05-11-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-1054 पर लिंक किया जा रहा है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  2. खुशी तो खुशी होती छोटी हो या बड़ी ,,,,,,

    RECENT POST : समय की पुकार है,

    उत्तर देंहटाएं
  3. खुशी तो खुशी होती
    छोटी या बड़ी से क्या
    फर्क पड़ता है
    - सच है !

    उत्तर देंहटाएं
  4. खुशी तो खुशी होती
    छोटी या बड़ी से क्या
    फर्क पड़ता है
    जब भी आती है मन स्‍वागत में नतमस्‍तक हो जाता है ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. kushi hona apne aap me khushi ki bat hoti hai,choti ho ya badi

    उत्तर देंहटाएं