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रविवार, 4 नवंबर 2012

ऐसा नहीं कि हमें उनसे मोहब्बत ना रही


ऐसा नहीं कि हमें उनसे मोहब्बत ना रही
ये बात जुदा है कि अब वो हमारी ना रहीं

ज़ज्बातों से खेलने की आदत पुरानी थी
अब उनकी हकीकत हमें पता चल गयी

गम नहीं की उनसे अब राजदारी ना रही
शायद  उनको भी हमारी ज़रुरत ना रही

जब  भी बदल जायेगी ,फितरत  उनकी
नहीं कह सकेगा कोई वो हमारी ना रही

बसा लेंगे फिर उन्हें अपनी ज़िन्दगी में
कह देंगे दुनिया को दिल से दूर नहीं रही

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
760-05-05-10-2012
शायरी,ग़ज़ल ज़ज्बात,मोहब्बत,गम,फितरत

12 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 27/10/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  2. bahut sundar prastuti बसा लेंगे फिर उन्हें अपनी ज़िन्दगी में
    कह देंगे दुनिया को दिल से दूर नहीं रही

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुंदर भावों से सजी रचना... आनंद की अनुभूति हो गयी... कभी आना.. http://www.kuldeepkikavita.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं