ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शनिवार, 3 नवंबर 2012

छोटा सा काँटा

चलते चलते
ध्यान रखते रखते भी
पैर में चुभ गया
छोटा सा काँटा
चलना रुका नहीं
पर दर्द से हाल बेहाल 
करने लगा
छोटा सा काँटा
पेड़ तले बैठ गया 
प्रयास करने लगा 
किसी तरह निकल जाए
छोटा सा काँटा
पैर लहुलुहान हो गया 
पर निकलने को 
राजी नहीं हुआ 
जिद पर अड़ गया
छोटा सा काँटा 
थक हार कर लंगडाते हुए
फिर सफर पर चल पडा 
समझ गया 
चाहे जितना भी 
ध्यान रख लो
ज़िन्दगी के सफ़र में
चुभ सकता है
छोटा सा काँटा
रुला सकता है
बिगाड़ सकता 
ज़िन्दगी की चाल
करता सकता हैरान
छोटा सा काँटा
कब चुभेगा 
पता नहीं चलता
कर देगा जीना दूभर
छोटा सा काँटा
ज़िन्दगी का सफ़र
आसान नहीं होता 
बता गया
छोटा सा काँटा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

755-51-27-09-2012
ज़िन्दगी,सफ़र,कष्ट,तकलीफ,

2 टिप्‍पणियां:

  1. अनुभव तो छोटे छोटे कांटे ही बढाते हैं ..

    उत्तर देंहटाएं
  2. समझ गया ध्यान
    कितना भी रख लो
    चुभ सकता है
    ज़िन्दगी के सफ़र में
    छोटा सा काँटा

    बहुत ही सही बात .. बड़ी चिभन होती है ऐसे में .. बेहतरी संभल कर चलने में ही है।।
    सुन्दर सार्थक रचना के लिए आभार ..
    सादर
    मधुरेश

    उत्तर देंहटाएं