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मंगलवार, 27 नवंबर 2012

जीवन का क्या भरोसा

जीवन का क्या भरोसा
कब तक
साथ देगा पता नहीं
जाने से पहले
जिनका ह्रदय दुखाया
उनसे क्षमा मांग लूं
जिनसे विश्वासघात किया
उनसे अपराध का
दंड मांग लूं
जीवन भर
अपराध बोध में जिया हूँ 
अब स्वयं को 
बोझ मुक्त कर लूँ
मुक्त कर लूं
इश्वर ने संसार में 
निश्छल
ह्रदय के साथ भेजा था
वो ह्रदय वापस पा लूँ 
रोते हुए आया था
हँसते हुए लौट जाऊं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
803-45-28-10-2012
ज़िन्दगी,जीवन ,निश्छल ह्रदय

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (28-11-12) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

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  2. माफ़ी ..मुक्ति का सशक्त मार्ग
    खूबसूरत भाव

    उत्तर देंहटाएं
  3. इश्वर ने संसार में भेजा था
    निश्छल ह्रदय के साथ
    वो निश्छल ह्रदय
    इश्वर को वापस कर दूं
    - उसने निश्छल ह्रदय के साथ जीने को भेजा था ,लौटाने क्या जल्दी!

    उत्तर देंहटाएं