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मंगलवार, 13 नवंबर 2012

ह्रदय जल रहा था



ह्रदय जल रहा था
मन प्रेम की भूख से
तड़प रहा था
मिली जब छाया
तुम्हारे ह्रदय में  
ह्रदय की भूख
मन की प्यास मिटी
तन को ताकत
मन को शांती मिली
मांझी को किश्ती
किश्ती को मिला
किनारा
इच्छाएं रुक गयीं
दुआएं पूरी हुयी
मैं तुम्हारा हुआ
तुम मेरी हुयी
777-21-23-10-2012
प्रेम,मन,ह्रदय,शान्ति

2 टिप्‍पणियां:

  1. कोमल भाव लिए सुन्दर रचना...
    आपको सहपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ...
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेह्तरीन अभिव्यक्ति .बहुत अद्भुत अहसास.सुन्दर प्रस्तुति.
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये आपको और आपके समस्त पारिवारिक जनो को !

    मंगलमय हो आपको दीपो का त्यौहार
    जीवन में आती रहे पल पल नयी बहार
    ईश्वर से हम कर रहे हर पल यही पुकार
    लक्ष्मी की कृपा रहे भरा रहे घर द्वार..

    उत्तर देंहटाएं