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रविवार, 25 नवंबर 2012

सुबह आँख खुली तो



सुबह आँख खुली
कमरे की खिड़की में बैठा 

मिट्ठू बोला
बोल बोल कर तुम्हें
उठाने का प्रयत्न किया
तुम नींद से जागे नहीं
थक हार कर बैठ गया
अपने आप से कहने लगा
उठोगे तो
प्रश्न अवश्य करूंगा
इतनी गहरी नींद में 

कैसे सोते हो
मिट्ठू की बात का
अचम्भा नहीं हुआ
निरंतर इस प्रश्न का
उत्तर देता रहा
आज 
गहरी नींद का 
सत्य उसे भी बता दूं 
मैंने कहा लोग 
दिन रात सपने देखते हैं
जो कल हो चुका
जो कल होने वाला है
उसकी चिंता में जागते हैं
न ठीक से सो पाते
न ठीक से जाग पाते
परेशानी में
ज़िन्दगी काटते रहते
मैं निश्चिंत सोता हूँ
जो हो चुका 

उससे शिक्षा लेता हूँ
जो होने वाला है
उसकी चिंता करे बिना
कर्म में लगा रहता हूँ
इसलिए गहरी नींद में
सो पाता हूँ
बात सुन कर मिट्ठू बोला
मैं भी अब आकाश को
नापने निकलता हूँ
कल फिर आऊँगा
पर तुम्हारे उठने के बाद
तब तक मैं भी
गहरी नींद में सोऊँगा

डा.राजेन्द्र तेला,निरंतर
799-41-25-10-2012

नींद,निश्चिंत

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह सुन्दर प्रविष्टि कल दिनांक 26-11-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  2. जो होने वाला है
    उसकी चिंता करे बिना
    कर्म में लगा रहता हूँ
    इसलिए गहरी नींद में
    सो पाता हूँ
    - ये तो बड़ी पते की बात बताई आपने !

    उत्तर देंहटाएं
  3. जिसने आज को जी लिया वह गहरी नींद सोयेगा.
    सत्य कहा.

    उत्तर देंहटाएं