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गुरुवार, 22 नवंबर 2012

ठण्ड का अहसास



जेठ की तेज़ गर्मी से
लहुलुहान दोपहर
लू से घबराकर
हर आदमी घर में
दुबका हुआ
चिड़ियाएँ खोमोशी से
घोंसलों में नींद ले रही
लू और गर्मी से
बिना घबराए
वो उसके इंतजार में
गली के नुक्कड़ पर
खड़े हो कर
रोज़ उसका इंतज़ार
करता
यही तो वो मौक़ा
किसी की नज़रों में आये
बिना वो अकेले में
उससे मिल सकता
तेज़ गर्मी और लू में भी उसे
ठण्ड का अहसास मिलता
792-34-25-10-2012
मोहब्बत,इंतज़ार,मुलाक़ात,अहसास

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 24/12/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  2. इस जाड़े में लू और गर्मी और ठण्ड का एहसास .. सोच बहुत दूर तलक है ... सुन्दर अभिव्यक्ति है ..इंतज़ार की , मोहब्बत की ..
    सादर
    मधुरेश

    उत्तर देंहटाएं
  3. खामोश से एहसास... !
    ~सादर

    उत्तर देंहटाएं