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शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

गम इस कदर आदत बन गया



गम अब इस कदर
आदत बन गया
एक दिन भी गुजर जाए
बिना उसके
मन नहीं लगता
शौक़ तो नहीं
ज़बरदस्ती पालूँ गम को
पर शायद
किस्मत में यही लिखा है
खुदा की रजा समझ
हँसते हँसते
गले लगाता हूँ
नहीं मिलता जिस दिन
किसी तरीके से ढूंढ लेता हूँ
इतना ज़ज्ब हो चुका दिल में
बिना गम के अब रहा
नहीं जाता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  
753-49-23-09-2012
गम,आदत,दुःख,ज़ज्ब ,ज़िन्दगी

1 टिप्पणी:

  1. बहुत अद्भुत अहसास...सुन्दर प्रस्तुति .पोस्ट दिल को छू गयी.......कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने..........बहुत खूब,

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