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गुरुवार, 18 अक्तूबर 2012

अपना पेट तो मैं भी भर लेता हूँ



दस साल के 
बच्चे को ढाबे पर 
बर्तन मांजते देखा
मन दुखी हुआ
उससे पूछ लिया
इतनी छोटी उम्र में
पढ़ते क्यों नहीं
काम क्यों करते हो
उसके जवाब ने मुझे
निरुत्तर कर दिया
कहने लगा
बाबूजी आपने पढ़ कर
क्या पा लिया
अपना पेट 
भरने के सिवाय
कितने भूखों का 
पेट भर दिया
कितने बच्चों को स्कूल
पढने भेज दिया
केवल बातें बनाना ही
तो सीखा है
वो तो मैं भी कर लेता हूँ
अपना पेट तो मैं भी
भर लेता हूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
07-09-2012
726-22-09-12
बाल श्रमिक,शिक्षा,पढाई,जीवन ,बचपन,भूख,गरीबी,

4 टिप्‍पणियां:

  1. एक खूबसूरत सीख देती हुई रचना सार्थक रचना |

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  2. सच ही कहा उस बच्चे ने , हम अपनी शिक्षा को क्या अर्थ दे पाते हैं !

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  3. प्रेरणात्‍मक प्रस्‍तु‍ति।

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