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रविवार, 21 अक्तूबर 2012

चाहूँ तो भी



चाहूँ तो भी
उनके सिवाय किसी को
याद करने का मन नहीं करता
क्या था उनमें जो
सब को मुझ से दूर रखता
न तो अब तक पता चला
न ही उन्होंने
जुदा होने से पहले बताया
शायद मजबूरियों ने
उन्हें मेरे साथ ना
रहने दिया
ना ही कहने दिया
वो भी  इस हद तक
मुझे चाहती थी
उनके सिवाय कोई
और मेरी यादों में
नहीं आये

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
13-09-2012
731-27-09-12
याद,मोहब्बत,चाहत

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