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सोमवार, 8 अक्तूबर 2012

आज फुर्सत में भी फुर्सत नहीं उन्हें हमारे लिए



आज फुर्सत में भी
उन्हें फुर्सत नहीं 
हमारे लिए
फिर भी कहते हैं 
दिल से चाहते हमें
क्या सच ? क्या झूठ ?
या तो खुदा जाने 
या उनका ज़मीर जाने 
हमारा तो दिल बस
उनके लिए ही धडकता
हर सांस पर
उनका ही नाम होता
ना मिले चाहे फुर्सत उन्हें
जीने के लिए
उनकी याद ही काफी है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
02-09-2012
709-05-09-12
प्यार,मोहब्बत,फुर्सत,याद,यादें

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