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रविवार, 7 अक्तूबर 2012

प्रतीक्षा में



नदी किनारे
अनमने भाव लिए
कदम्ब के पेड़ के नीचे बैठी
विचारों के 
जाल में उलझी थी
गगन में काले बादलों की 
गडगडाहट
मन में 
विचारों का द्वन्द
व्यथा बढ़ा रहे थे
त्वरित गति से 
बह रही नदी 
पथ में आने वाली 
हर वस्तु को 
अपने साथ बहा कर 
ले जा रही
नदी के पानी की भाँती
 विचार भी त्वरित गति से 
आ जा रहे थे
मन में 
ढेरों आशंकाएं 
आकांशाओं को 
निराशा में बदल रही थी
प्रियतम से मिले 

महीनों हो गए
बार बार के वादों के
बाद भी नहीं आये
हर बार नए बहाने का
सन्देश अवश्य आया
प्रतीक्षारत थी
 कब नदी की धारा
मंद पड़ेगी
काले बादल विदा होंगे
नीले गगन के दर्शन होंगे
सूरज फिर चमकने लगेगा
उसकी प्रतीक्षा की
घड़ियाँ भी समाप्त होंगी
मन के आकाश में
आशाओं का सूरज चमकेगा
प्रियतम से मिलन होगा
निराशा के काले बादलों से
छुटकारा मिलेगा

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
01-09-2012
706-02-09-12
अनमने,भाव , प्रियतम,मिलन, प्रतीक्षा, विचार, सफलता ,घमंड ,इंतज़ार,प्रेम ,प्यार

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