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बुधवार, 3 अक्तूबर 2012

दोस्ती में सौदा मत करो



खुद नफरत से 
जीते हो
बात बात पर 
रूठते हो
रुसवा करने की 
धोंस देते हो
हम से वफ़ा की
उम्मीद करते हो
निरंतर
अंगारे बरसाते हो
हमसे फूलों का
गुलदस्ता चाहते हो
क्यों नहीं समझते?
दोस्ती में निरंतर
लेने से
ज्यादा देना पड़ता
दुश्मन आसानी से 
मिलते है 
दोस्त किस्मत 
वालों को मिलते है 
दोस्ती में सौदा मत करो
दोस्ती की कद्र करो
इलज़ाम
लगाना बंद करो
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
26-08-2012
698-58-08-12

दोस्त,दोस्ती,सौदा,नफरत

7 टिप्‍पणियां:

  1. दोस्ती को दोस्ती ही रहने दिया जाए तोही अच्छा है

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 06/10/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत अच्छी रचना !

    ~दोस्ती सौदा नहीं...
    दोस्ती शफ्फाक़ है..
    प्यारा उजास है..
    कोमल एहसास है...
    जिस दिल में बसी दोस्ती..
    वहाँ ईश्वर का वास है...!!!:-)
    ~सादर !

    उत्तर देंहटाएं
  4. एकदम सही बात कही है आपने..
    बहुत अच्छी रचना..
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  5. बात वही जो हर किसी का दिल को छू जाए

    उत्तर देंहटाएं