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रविवार, 14 अक्तूबर 2012

वर्षा पर कविता -सूरज ने घर के दरवाज़े बंद कर लिए


सूरज ने
घर के दरवाज़े
बंद कर लिए
उजाले को
घर के अन्दर
छुपा लिया
आकाश में काला
अन्धेरा छा गया
इंद्र ने मौक़ा ताड़ा
घनघोर बादलों को
भेज दिया
बादल उमड़ घुमड़ कर
बरसने लगे
नदी नाले बहा दिए
किसानों के चेहरे
चमकने लगे
अग्नी भी चुप नहीं रही
आकाश में बिजली बन
चमकने लगी
वरुण ने
भेज दी ठंडी हवाएं
वातावरण को
ठंडा कर दिया
पक्षी नीड़ों में छुप गए
मिट्टी महकने लगी
बच्चे मस्ती में नाहने लगे
वर्षा के गीत गाने लगे
बारिश बारिश आयी
हर चेहरे पर ख़ुशी छा गयी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
03-09-2012
719-15-09-12

वर्षा,बारिश ,बरसात,सूरज,इंद्र,वरुण,अग्नि, बादल

2 टिप्‍पणियां:

  1. अरहर के फूलो से
    उतरी कार्तिक की
    पियराई सांझ ।
    लौटे वंशी स्वर
    रम्भाती गाये ,
    हलधर के हल पर
    उतरी थकी हुयी
    मटमैली सांझ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह!
    आपकी इस ख़ूबसूरत प्रविष्टि को कल दिनांक 15-10-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-1033 पर लिंक किया जा रहा है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं