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शनिवार, 27 अक्तूबर 2012

रोशनी से भरे छोटे छोटे घरोंदे



ज़िन्दगी के हंसी
लम्हों की रोशनी से भरे
छोटे छोटे घरोंदे
मेरे यादों  में बसे हैं
ग़मों के बड़े बड़े मकान
मेरे दिल और ज़हन में
डेरा डाले हैं
जो मुझे सुकून से नहीं रहने देते
बार बार हैरान करते हैं
जब भी हैरानी सही नहीं जाती
मैं कमरे की खिड़की से
हरे भरे बगीचे को देखता हूँ
फूलों को निहारता हूँ
ज़िन्दगी के हसीं लम्हों को
याद करता हूँ
यादों में बसे रोशनी के घरोंदों से
रोशनी की किरणें
मेरे मन को रोशन करने लगती
मेरे बेचैनी कम होने लगती
हैरानी गुम हो जाती
मैं खुद को तरोताजा महसूस
करने लगता हूँ
फिर खुशी से काम में
लग जाता हूँ
739-35-19-09-2012
यादें,याद,लम्हे.हंसी लम्हे,ज़िन्दगी

2 टिप्‍पणियां:

  1. जब भी हैरानी सही नहीं जाती
    मैं कमरे की खिड़की से
    हरे भरे बगीचे को देखता हूँ

    achcha sujhav diya aapne... aabhar!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. खुद को प्रकृति के करीब कर लिया हैं आपने ....बेहद खूबसूरत मन के भाव

    उत्तर देंहटाएं