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शुक्रवार, 26 अक्तूबर 2012

जब मन नहीं लगता



जब मन नहीं लगता
कुछ भी अच्छा नहीं लगता
चाहे टी वी चलाओ
चाहे संगीत सुनो
हर पल भारी लगता
किसी से बात करने का
मन नहीं करता
ना नींद आती
ना जागने का मन करता
समय काटे नहीं कटता
आँखें बार बार
घड़ी को देखती
लगता है
सुइयां सरक नहीं रही
कब बीतेंगे ये पल
चेहरे पर मायूसी
मन में बेचैनी बढ़ने लगती
मन बार बार कहता
सब व्यर्थ है
ऐसा होता है जब मन
नहीं लगता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  
738-34-19-09-2012
मन,बेचैनी,जीवन,मन नहीं लगना

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