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सोमवार, 22 अक्तूबर 2012

मेरी यादों को मिटाने की कोशिश में



यादों को
मिटाने की कोशिश में
वो खतों को फाड़ रहे हैं
तस्वीरों को जला रहे हैं
घर के कोने कोने से
मुझसे जुडी हर चीज़ का
नाम-ओ-निशाँ मिटा रहे हैं
चाहे कितनी भी नफरत
कर लें मुझसे
साथ बिताए लम्हों को
कैसे मिटायेंगे
दिल में ज़ज्ब सूरत को
कैसे हटायेंगे
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
14-09-2012
732-28-09-12
यादें,मोहब्बत,नाम-ओ-निशाँ ,नफरत

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा मंगलवार २३/१०/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका स्वागत है

    उत्तर देंहटाएं
  2. ग़जब का आक्रोश व्यक्त किया है
    .. सुन्दर प्रस्तुती

    आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा।


    अगर आपको अच्छा लगे तो मेरे ब्लॉग से भी जुड़ें।
    धन्यवाद !!
    http://rohitasghorela.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं