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बुधवार, 10 अक्तूबर 2012

कैसे कहूँ मैं वो नहीं हूँ



कैसे कहूँ
मैं वो नहीं हूँ
जो तुमने समझा मुझे
मैं वो हूँ जो जाना नहीं
अब तक तुमने
ना मैं तुमसे प्यार करता हूँ
ना तुम्हारा दोस्त हूँ
ना रिश्तेदार ना पड़ोसी
ना जान पहचान वाला
ना तुम्हारे शहर में
रहता हूँ
ना तुमसे मिला
ना देखा कभी
मेरी बातें सुन कर
परेशान मत होना
मुझे सिर फिरा भी
मत समझना
तुम्हें मन में बसा रखा है
तुम मेरी साधना
मैं तुम्हारा साधक हूँ
तुम्हारी साधना से
मुझे चैन मिलता है
जीना सार्थक होता है
तुम मेरे लिए
पञ्चतत्व हो
जिनके बिना जीना
असंभव है

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
02-09-2012
712-08-09-12
साधक ,साधना,पञ्चतत्व

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