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शुक्रवार, 19 अक्तूबर 2012

उन्हें तो बरसना है,केवल बरसना है



काले बादल 
गरजते बादल 
जल से भरे 
घमंड में चूर बादल 
उन्हें किसी से
क्या लेना देना
उन्हें तो बरसना है
केवल बरसना है
यह भी नहीं पता
कहाँ बरसना है
कितना बरसना है
चाहे किसी का 
घर ढह जाए
कोई पानी में बह जाए
पेड़ पौधे गल जाएँ
मानवीय भावनाओं से दूर
घमंड में सफलता की
ऊंचाइयां छू रहे
लोगों का भी यही हाल है
वो भी केवल
अपने लिए ही जीते हैं
उनकी भूख मिटनी चाहिए
किसी और से उन्हें
क्या मतलब
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
07-09-2012
727-23-09-12
जीवन ,स्वार्थ ,घमंड, मानवीय भावनाओं, भावनाएं,

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