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रविवार, 14 अक्तूबर 2012

अब कोई मुझे मनहूस ना समझे

बारिश की बूँदें
जब मेरे कमरे की
खिड़की पर टप टप
दस्तक देती हैं
ख्यालों में डूब जाता हूँ
कभी खुदा भी
मेरी किस्मत पर
रहम की बारिश कर दे
ऐसी ही आवाज़ से
सारी दुनिया को बता दे
मेरी बदकिस्मती
ख़त्म हो गयी है
अब कोई मुझे 
मनहूस ना समझे
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
03-09-2012
718-14-09-12
मनहूस,किस्मत,ख्याल

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