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गुरुवार, 11 अक्तूबर 2012

मिला था अनजान बन कर



मिला था
अनजान बन कर
 बहार बन कर 
दिल पर छा गया 
चेहरे पर चेहरा
चढ़ा कर आया था
खिजा साथ 
छुपा कर लाया था
दोस्त के भेष में
दुश्मन निकला
मोहब्बत का सिला
ऐसा दिया
ना जीने दिया 
ना मरने दिया
कातिल बन कर
साथ निभाता रहा
जाते जाते तोहफे में 
तन्हाई दे गया 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
02-09-2012
712-09-09-12
मोहब्बत ,चेहरे पर चेहरा,अनजान ,मोहब्बत का सिला,दोस्त,दुश्मन

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