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गुरुवार, 27 सितंबर 2012

यूँ ही मिल गया कोई



यूँ ही मिल गया कोई
चलते चलते
दिल में चिराग लिए
देखा जो अन्धेरा उसने
दिल में मेरे
चिराग मुझे थमा दिया
हो गया मैं भी रोशन
उसके इस कारनामे से
खुश हो कर
जब पूछा मैंने उससे
तुम्हारे दिल का क्या होगा
बड़ी शिद्दत से वो
कहने लगे
जिसको चिराग 
समझा तुमने
वो चिराग नहीं
मेरी मोहब्बत है 
जब तक जलती रहेगी
शमा मोहब्बत की 
दिल में तुम्हारे
यूँ ही रोशन करती
रहेगी
ज़िन्दगी तुम्हारी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
21-08-2012
678-38-08-12

शायरी, मोहब्बत, दिल

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (29-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  2. डॉ राजेन्द्र तेला "निरंतर" जी -


    यूँ ही मिल गया कोई
    चलते चलते
    दिल में चिराग लिए
    देखा जो अन्धेरा उसने
    दिल में मेरे
    चिराग मुझे थमा दिया
    हो गया मैं भी रोशन
    उसके इस कारनामे से
    खुश हो कर
    जब पूछा मैंने उससे
    तुम्हारे दिल का क्या होगा
    बड़ी शिद्दत से वो
    कहने लगे
    जिसको चिराग
    समझा तुमने
    वो चिराग नहीं
    मोहब्बत है मेरी
    जब तक जलती रहेगी
    शमा मोहब्बत की दिल में
    तुम्हारे
    यूँ ही रोशन करती
    रहेगी
    ज़िन्दगी तुम्हारी-रचना अच्छी लाये हो लेकिन घर के घर में ही रहते हो ,घर से बाहर भी निकला कीजिए .एक शैर आपकी खिदमत में -

    कुछ लोग इस तरह जिंदगानी के सफर में हैं ,

    दिन रात चल रहें हैं ,मगर घर के घर में हैं .इतना बढ़िया लिख रहें हैं लेकिन एक एक दो दो टिपण्णी लिए बैठें हैं आप जैसे कई लोग और .जानतें हैं क्यों .आप घर से बाहर नहीं निकलते .किसी और के ब्लॉग पे भी दस्तक दीजिए .ये अपना ही दुनिया है अपने ही लोग हैं .

    ब्लॉग जगत में शब्द कृपणता ठीक नहीं .

    उत्तर देंहटाएं