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रविवार, 9 सितंबर 2012

हम तो गिर कर उठते रहे हैं

जो भी चाल चलनी है
जिस को भी चलनी है
जी भर के चल ले
जितनी भी नफरत
रखनी है रख ले
हमें तो आदत है
दोस्तों को
दुश्मन बनते देखने की
कोई कितनी भी
कोशिश कर ले
हमें नेस्तनाबूद करने की
हम तो गिर कर उठते रहे हैं
फिर उठ जायेंगे
उनका क्या होगा
जिन्हें आदत सिर्फ गिराने की
इतना थक जायेंगे
हम को बार बार
गिराने की कोशिश में
खुद गिर गए एक बार भी
तो कभी उठ ना पायेंगे 
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
03-08-2012
645-05-08-12

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सही लिखा हैं डॉ ....

    आज ही एक पोस्ट डाली हैं ब्लॉग पर ...कुछ मिलती जुलती सी ...आप पढ़ना जरुर

    उत्तर देंहटाएं