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सोमवार, 3 सितंबर 2012

समझता था



समझता था
जीवन में बहुत कुछ पाया 
ज़िन्दगी को भरपूर जिया 
 बुढापा आराम से काटूंगा
जो नहीं किया अब तक
वह सब करूंगा
दुनिया छोड़ने से पहले
हर इच्छा पूरी  करूंगा
कितना गलत थी मेरी सोच 
जब देखा 
मेरे आस पास कोई खुश नहीं था
पहले तो समझा सब गलत
केवल मैं सही था
समय के साथ सब ठीक
हो जाएगा
कुछ इंतज़ार के बाद पाया
सब सही मैं ही गलत था
देर तो हो चुकी थी
मगर होश नहीं खोया था
निरंतर प्रयासरत हूँ  
जो मिला उसका सम्मान करूँ
जो नहीं मिला 
,  उसकी इच्छा नहीं रखूँ
जीते जी अपनों को खुश
नहीं कर सका
दुनिया से जाने से पहले
अगर उन्हें  खुशी नहीं दे सका
तो समझूंगा
जो भी किया अब तक 
सब व्यर्थ था
केवल अपने लिए जिया था
डा.राजेंद्र तेला,निरन्तर 
31-07-2012
635-32-07-12

1 टिप्पणी:

  1. सच ही तो हैं ...पूरा जीवन निकल जाता हैं अपनों को मानने में

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