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शनिवार, 29 सितंबर 2012

तुम फ़रिश्ता बनो ना बनो



तुम फ़रिश्ता
बनो ना बनो
इंसान तो बनो
स्वर्ग में जाओ ना जाओ
ज़मीन पर तो
इन्सान बन कर रहो
भगवान् से
प्रार्थना करो ना करो
इंसान से प्यार तो करो
मंदिर में जाओ
या मस्जिद में जाओ
शराफत से तो जियो
हँसो या रोओ
दूसरों को तो मत
रुलाओ
21-08-2012
681-41-08-12


4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 03/10/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  2. बेहतरीन प्रस्तुति है आपकी ये कविता ,सच तो येही है कम से कम इंसान तो बने रहें

    उत्तर देंहटाएं