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रविवार, 23 सितंबर 2012

जीवन का बदलता रंग



नए मकान की 
दीवारों के रंग जैसे 
परिवार की दीवारों का 
चमकता,दमकता
सब से खूबसूरत रंग
होता था
समय के अंतराल में
मकान में नए नए 
कमरे बनते गए
परिवार में भी
नए सदस्य जुड़ते गए
दिन पर दिन
मकान जैसे ही 
मेरा रंग भी फीका
पड़ता गया
अपनी आभा खोता गया
रिश्तों की 
दीवारों से विश्वास
पपड़ी सा खिरता गया
अब बस इंतज़ार है
कब दीवारों का रंग
बदल दिया जाएगा
चमकता हुआ
नया रंग चढ़ाया जाएगा
नए रंग के सामने
फीका पड़ता जाऊंगा
समय के साथ
नेपथ्य में छुप जाऊंगा

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

21-08-2012
670-30-08-12
परिवार,जीवन,रिश्ते


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