ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शनिवार, 29 सितंबर 2012

जब नींद नहीं आती



रात को जब
ख्याल परेशान करते हैं
नींद नहीं आती 
तुम्हें याद करने लगता हूँ
ख़्वाबों में मिलने की
ख्व्हाइश करता हूँ
तुम कहोगी
तुम जुदा हो चुकी हो 
फिर क्यों तुम्हें याद
करता हूँ ?
जवाब सुन कर
नाराज़ ना होना
जब परेशान ही होना है
तो क्यों नहीं तुम्हें ही
याद करूँ
तुम्हारा सुन्दर चेहरा तो
दिखेगा
जुदाई में भी मिलन का
अहसास तो होगा 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
21-08-2012
680-40-08-12
शायरी,ख़्वाबों में,ख्वाब,जुदाई ,मिलन,मोहब्बत,ख्याल

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें