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शुक्रवार, 14 सितंबर 2012

गुनाह की सज़ा



बहुत अरसे के बाद
उनका ख़त आया
हमने समझा उनका
घमंड चूर हो गया
नफरत छोड़
अब क्यूं उन्हें
मोहब्बत का ख्याल आया?
ख़त खोला तो उसमें
लिखा था
हमारा हर ख़त ज़ला कर
राख कर देना
साथ बिताया हर लम्हा
भूल जाना
जुबां से हमारा नाम तक
ना लेना
तुम पर शक कर
हमने जो गुनाह किया
उसकी सज़ा खुद को दे रहे हैं
साथ में उनके भाई का
ख़त भी था
जिसमें लिखा था
ख़त खुदकशी के बाद
बहन की
लाश के पास मिला था
13-08-2012
658-18-08-12

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