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गुरुवार, 23 अगस्त 2012

अच्छा हो अब ज़ख्म ना भरे कोई



अच्छा हो अब
ज़ख्म ना भरे कोई
गुजार लिए दिन
दर्द सहते सहते कई
आदत सी पड गयी
क्यूं शौक लगाऊँ
अब नया कोई
लगा भी देगा
अगर मरहम कोई
कैसे यकीन करूँ
नया दर्द नहीं देगा
फिर कोई
इस हाल में ही खुश हूँ
बस मुस्करा देख ले
अब कोई
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर   
शायरी,दर्द 
17-07-2012
609-06-07-12

3 टिप्‍पणियां: