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बुधवार, 8 अगस्त 2012

न अब उम्मीद करते हैं न दुआ करते हैं



न अब 
उम्मीद करते हैं
न दुआ करते हैं
किस्मत समझ चुपचाप सहते हैं
अब तक मिला नहीं सुकून
मिल जाए तो खुश हो लेंगे
न मिला तो
हमेशा की तरह सह लेंगे
चुपचाप रो लेंगे
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
07-06-2012
581-31-06-12

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