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शुक्रवार, 17 अगस्त 2012

आज फिर फिसल गया,गहरी चोट खा गया



आज फिर फिसल गया
गहरी चोट खा गया
जिसने पकड़ा था हाथ
उसने ही छुडा लिया
मांझी ने ही किश्ती को
डूबा दिया
ना सुकून मिला
ना साहिल मिला
कातिल का असली
चेहरा दिख गया 
वफ़ा को बेवफाई में
बदलते देख लिया
आज फिर फिसल गया
गहरी चोट खा गया
25-06-2012
594-44-06-12

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (19-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेवफाई की चोट शारीरिक चोट से ज्यादा कष्ट देती है ------बहुत अच्छा लिखा

    उत्तर देंहटाएं