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बुधवार, 22 अगस्त 2012

बौने हैं हम


बौने हैं हम
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बौने हैं हम
भाग्य के मारे हैं हम
पूरे हो कर भी
अधूरे हैं हम
बेगुनाह हो कर भी 
गुनाहगार कहलाते हैं हम 
बचपन से बुढापे तक
हमारी भावनाओं को 
कोई नहीं समझता
ज़िन्दगी से लेकर
सर्कस तक हँसी के
पात्र हैं हम
तिरिस्कार सहते हैं हम
मन ही मन घुटते हैं हम
बच्चों से बूढों तक
सब को हँसाते हैं हम
जीना है इसलिए
दिखते नहीं
आंसू किसी को हमारे
खून के आंसू पीते हैं हम
चुपचाप सहते हैं हम
निरंतर
इश्वर से प्रार्थना हमारी
किसी को ना दे ऐसा
नसीब
खुद रोते हैं दूसरों को
हँसाने के लिए हम
बौने हैं हम

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
17-07-2012
606-03-07-12

3 टिप्‍पणियां:

  1. very good thoughts.....
    मेरे ब्लॉग

    जीवन विचार
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. एक अगल सोच ...बेहद गंभीर और संजीदा

    उत्तर देंहटाएं
  3. और 'शायद' जिंदगी इसी को कहते हैं...

    उत्तर देंहटाएं