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गुरुवार, 2 अगस्त 2012

राह मुश्किल हो गयी तो क्या चलना बंद कर दूं



राह मुश्किल हो गयी
तो क्या चलना बंद कर दूं
गिर गया तो क्या उठूँ नहीं
जो चलेगा वही तो गिरेगा
उठेगा नहीं तो
मंजिल पर कैसे पहुंचेगा
मैं उनमें से नहीं
जो हार मन कर बैठ जाते
मानता हूँ दर्द भी होता है
आँखों में आंसू भी आते हैं
लड़ता रहा हूँ ज़माने से
वक़्त के थपेड़ों से
हर बार अंत में मैं ही हँसा हूँ
इस बार भी मैं ही हँसूँगा
सदा की तरह चलता रहूँगा
हिम्मत होंसले से
आगे बढ़ता रहूँगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
05-06-2012
568-18-06-12

1 टिप्पणी:

  1. hosala man me hai ,
    dilo me bhara josh
    baatate hai pyar ,
    phir kaise harega yah
    man ka sansaar ....................:))

    उत्तर देंहटाएं