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रविवार, 19 अगस्त 2012

अब तक पता नहीं था



अब तक 

पता नहीं था
चुप रहना
जुबां को आराम देना
कितना अच्छा होता है
अब चुप रहता हूँ
खुशी से जीता हूँ
ना कोई नाराज़ होता है
ना जवाब में
अपशब्द कहता है
ना रिश्तों में दरार आती
ना मनों में फर्क आता है
जब भी मिलता है
गले लग कर मिलता है
हर शख्श मुझे
अब दोस्त समझता है
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
25-06-2012
598-48-06-12

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल २१/८/१२ को http://charchamanch.blogspot.in/ पर चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका स्वागत है

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