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शनिवार, 25 अगस्त 2012

अफ़साने


जब भी रात में
तुझ को
याद करता हूँ 
तेरी बेवफाई के
के अफ़साने
ज़हन में आ जाते हैं
दिल में इक 
टीस उठती है
क्यूं भूलता नहीं ये
अफ़साने
कब तक रुलाते रहेंगे  
ये खौफ से भरे
अफ़साने
हर रात को जगायेंगे
ये अफ़साने


डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  
17-07-2012
612-09-07-12

3 टिप्‍पणियां:

  1. अफ़साने
    कब तक रुलायेंगे मुझे
    ये खौफ से भरे
    अफ़साने
    हर रात को जगायेंगे
    ये अफ़साने...........
    yah to nindo ko chrenge
    afsane hamen pal pal
    tadpaayenge
    koi kitna bhi kahe
    jakhmo ke nishaan chod kar jayenge

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (26-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं