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रविवार, 19 अगस्त 2012

क्यों कहते,तुम अकेले हो

क्यों कहते हो
तुम अकेले हो
किसी के साथ
कोई नहीं होता
तुम कहते हो
तुम अकेले हो
हर तरह के इंसान
मिलते जीवन में
जो हँसाते भी हैं
रुलाते भी हैं
दर्द कम भी करते हैं
बढाते भी हैं
ये तुम पर निर्भर है
तुम किस की बातों से
प्रभावित होते हो
किन बातों को
हृदय से लगाते हो
साथ ढूँढने से पहले
स्वयं को सुद्रढ बनाओ
स्वयं पर विश्वास रखो
कोई मिले ना मिले
स्वयं को
अकेला नहीं पाओगे
स्वयं रास्ता बनाओगे
न विफलता का मुंह देखोगे
ना कभी किसी से कहोगे
तुम अकेले हो
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
25-06-2012
597-47-06-१२

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