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शनिवार, 18 अगस्त 2012

पहली बारिश के बाद



पहली
 बारिश के बाद
मन डोलने लगा
उनसे मिलने को
तरसने लगा
हम बड़ी शिद्दत से
उनके
 घर का दरवाज़ा
खटखटाते रहे
उनसे मिलने को
तरसते रहे
वो बेखबर
गहरी नींद में
सोते रहे
सपनों की
दुनिया में गोते
लगाते रहे
25-06-2012
595-45-06-12

1 टिप्पणी:

  1. चुक हो गयी है जो वो सपनों में
    खो गयी है...वरना हकीकत तो सामने दरवाजा
    खटखटा रही है.....
    :-)

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