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शुक्रवार, 10 अगस्त 2012

लोगों ने पत्थर तो नहीं फैंके



लोगों ने
पत्थर से तो नहीं
बातों से मारा  मुझ को
बातों में 
मगर
वज़न पत्थर से भी 
ज्यादा था
इतना कि
उठ ही नहीं सका
दोबारा
फूल समझ कर
झेलता गया
उनकी हर मार पर
हँसता रहा
उनकी जुबान में
जवाब ना दे सका

अपने थे इसलिए
खून का घूँट पी कर के
चुपचाप सहता रहा

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
 
07-06-2012
585-35-06-12

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